क्या वैज्ञानिक भगवान को मानते हैं या नहीं?

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क्या वैज्ञानिक भगवान को मानते हैं या नहीं?

क्या वैज्ञानिक भगवान को मानते हैं या नहीं? जाने आस्था और विज्ञान ।

दोस्तों इस पोस्ट में हम आपके साथ साझा करने वाले हैं कि वास्तव में क्या वैज्ञानिक (Scientist) भगवान (God) खुदा गवाह अल्लाह को मानते हैं कि नहीं, आस्था और विश्वास से जुड़ा पहलू हैं विज्ञान को प्राथमिकता या भगवान को इसी बात पर हम आपके साथ कुछ महत्त्वपूर्ण चर्चा करने वाले हैं। पोस्ट को पूरा पढ़ें, चलिए शुरू करते हैं।

क्या विज्ञानिक भगवान को मानते हैं? (Do Scientists Believe God?)

क्या विज्ञानिक भगवान को मानते हैं कि नहीं वास्तव में भगवान (God) का Really है या नहीं, इस बात को लेकर बहुत समय पहले से, लगभग (Almost) सदियों से बहस चली आ रही है। कुछ लोग जहाँ ऐसे अंधविश्वास मानते हैं तो, वहीं कुछ लोगों के लिए यह आस्था का सवाल है।

आस्था और अंधभक्ति के इस खेल को परखने के लिए Scientist ने कई दावे किए, जिसमें ईश्वर के वजूद को लेकर कुछ महत्त्वपूर्ण तर्क दिए. उन तर्कों को हम गॉड ज्ञान (God Gyan) पोस्ट से जानेंगे। वैज्ञानिक भगवान को मानते है

भगवान की उत्पत्ति कैसे हुई? (How did God originate?)

भगवान की उत्पत्ति कैसे हुई, इस बात का उदाहरण कई धार्मिक ग्रंथों (Religious texts) में देखने को मिलता है। विशेषकर अलग-अलग धर्म ग्रंथों में इसकी कुछ उदाहरण तौर पर चर्चा की गई है। ईसाई धर्म ग्रंथ बाइबिल (Bible) के प्रथम अध्याय इन द बिगिनिंग गॉड में ईश्वर को महत्त्व को बताया गया है। इसके मुताबिक इस धरती को स्वर्ग को ईश्वर ने ही बनाया है।

जीवन और मृत्यु (life and death) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ज़िन्दगी का मतलब किसी नई चीज का हमारे जीवन में विकास, वही मृत्यु का मतलब है सांसारिक चीजों को त्याग ईश्वर में लीन होना। आध्यात्मिक किताबों में बतलाते हैं कि मरने के बाद व्यक्ति को स्वर्ग और नर्क की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति के कर्म पर आधारित होता है।

इस बात की पुष्टि कुछ साल पहले 2008 में हावर्ड के एक तांत्रिक वैज्ञानिक (Tantric scientist) एक इबेन एलेग्जेंडर तृतीय ने किया। उनके दावे के अनुसार उनका ब्रेन डेड करीब 1 सप्ताह तक कोमा में रहने के चलते पूरी तरह से बंद हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने स्वर्ग के वातावरण को महसूस किया।

वैज्ञानिक की बात को परखने के लिए (To test a scientist’ s point)

वैज्ञानिक की इस बात को परखने के लिए उनके मस्तिष्क (Brain) की जांच की गई और डॉक्टरों ने पाया कि मस्तिष्क का वह हिस्सा जो सुनता है, समझता है और कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। वह पूरी तरह से बेकार हो चुका था। इसके बावजूद इबेन कोमा से जागने के बाद अलैंगिक अनुभव की बातें बता रहे थे यह हैरान करने वाली चीज है।

ईश्वर के अस्तित्व को साबित करते हैं, कहते हैं दुनिया में मौजूद सभी छोटी-बड़ी चीजों की रचना ईश्वर ने की तभी सबूत 1725 में जर्मन पर्वतों पर देखने को मिला। इनमें छिपकली मेंढक मकड़ी मछली के चेहरे वाले पक्षी, चांद सितारे के आकार में कटे हुए को चूना पत्थर मिले थे। उनमें से बहुत से पत्थरों पर हीब्रू लेटिन (Hebrew Latin) और प्राचीन अरब भाषा में ईश्वर का नाम लिखा हुआ था।

इस बात की खोज बर्जबर्ग विश्वविद्यालय के फैकेल्टी ऑफ मेडिसिन केडीन जोहान बाथलूमियास एडन बेरिंग ने की थी। जोहान के मुताबिक ईश्वर जिस रूप में आकृतियाँ बनाना चाहता था उसे पहले पत्थर पर उकेरा गया और उसके बाद उनमें जान डाली गई, ईश्वर के अस्तित्व को साबित करने के लिए इनमें से कई पत्थरों को नीदरलैंड के टेलर्स म्यूजियम और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी म्यूजियम (Oxford University Museum) में भी सहेज कर रखा गया।

आत्मा जब परमात्मा में लीन हो (When the soul is absorbed in the divine)

God से जन्म और मृत्यु के भी तार जुड़े हैं। इसलिए माना जाता है कि व्यक्ति की आत्मा जब परमात्मा में लीन हो रही होती है। तब उसे सुरंग में से एक तेज रोशनी आती हुई दिखाई देती है। इस बात की पुष्टि बेल्जियम के न्यूरोलॉजिस्ट स्टीवन लारी जेके यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल बेल्जियम के कॉमर्स साइंस ग्रुप ने की है।

उन्होंने कई मरीजों का परीक्षण कर पाया कि जब भी मरने वाले थे, तब उनका दिमाग़ कोमा में जा रहा था। उस वक़्त उनके शरीर में सिरहने होती है और उन्हें एक सुरंग में जाने का एहसास होता है।

भगवान के होने ना होने का सबूत ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि महा विस्फोट के जरिए सृष्टि की उत्पत्ति हुई. जबकि आध्यात्मिक तौर पर ईश्वर की मर्जी के बिना इन चीजों का निर्माण संभव नहीं है। क्योंकि वैज्ञानिक आज तक विज्ञानी महा विस्फोट के होने का कारण नहीं खोज सके. इसलिए इसे भगवान का चमत्कार खुदा गॉड अल्लाह का चमत्कार ही माना जाता है।

धरती की उत्पत्ति कैसे (How the earth originated)

भगवान के होने का दूसरा प्रमाण प्रकृति को देखकर भी लगता है। क्योंकि दुनिया (world) में कई तरह के जीव जंतु मौजूद हैं। इसमें इंसान भी शामिल है इन सब की उत्पत्ति अचानक धरती पर कैसे हुई, इस बात का पता आज तक विज्ञान नहीं लगा पाए.

इसलिए इसे God की रचना मानी जाती है। मानव शरीर (Human body) की संरचना का गठन भी भगवान के चमत्कार के तौर पर देखा जाता है। क्योंकि एक व्यक्ति का जन्म होता है और वह कैसे विकसित होता है। इन सब के पीछे साइंस भगवान (God) में ही समाया हुआ है।

क्योंकि क्योंकि इन और ऑर्गनम का विकास कैसे हुआ और कैसे एक नन्हे से जीव को जीवन (Life) मिला, इस सारी गुत्थी अभी तक अनसुलझी हैं। आध्यात्मिक रूप से God का बास इंसान के अंदर होता है। तभी एक व्यक्ति चाहे वह कुछ भी कर सकता है। मगर एक मामूली से इंसान में इतनी ताकत कहाँ से आती यह एक चमत्कार की तरह लगता है।

पोस्ट निष्कर्ष

दोस्तों आपने इस पोस्ट में जाना की वैज्ञानिक भगवान को मानते हैं कि नहीं और विज्ञान कहाँ तक है और भगवान कितना पावरफुल है आशा है आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। इस गॉड ज्ञान की पोस्ट को अपने सोशल नेटवर्क पर ज़्यादा से ज़्यादा सांझा करें। धन्यवाद

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2 thoughts on “क्या वैज्ञानिक भगवान को मानते हैं या नहीं?”

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