विनम्रता पर महापुरुषों के अति सुंदर 37 विचार। Vinamrata पर सुविचार

विनमता नम्रता क्या है? नम्रता का जीवन में क्या महत्त्व है? क्या लाभ है? कौन होते हैं नम्र व्यक्ति? विनयशीलता अथवा नम्रता की व्यक्ति की सफलता में क्या भूमिका है आइये जानें। विनम्रता (Vinamrata) पर महापुरुषों के अति सुंदर विचार जिससे हमारे जीवन में एक परिवर्तन होता है और हम एक विनम्र भाव से अच्छे गुणों के साथ अपने जीवन को परिवर्तित कर सकते हैं। आप इन महापुरुषों के Vinamrata पर महत्त्वपूर्ण विचारों को जरूर पढ़ें चलिए तो स्टार्ट करते हैं किसने क्या कहा?

Vinamrata par mahapurusho ke vichaar
Vinamrata par mahapurusho ke vichaar

विनम्रता कोट्स इन हिन्दी महापुरुषों के 37 विचार (Humility Quotes in Hindi)

1-रवीन्द्रनाथ ठाकुर (Rabindranath Thakur) ने कहा: नम्रता दिखाते समय हम महान् व्यक्तियों के समकक्ष हो जाते हैं।
2-प्रेमचन्द (Premchand) ने कहा: जहाँ नम्रता से काम निकल जाए वहाँ उग्रता नहीं दिखानी चाहिए।
3-आचार्य रजनीश (Acharya Rajneesh) ने कहा: असली सवाल यह है कि भीतर तुम क्या हो? अगर भीतर गलत हो, तो तुम जो भी करोगे, उससे गलत फलित होगा। अगर तुम भीतर सही हो, तो तुम जो भी करोगे, वह सही फलित होगा।
4-शेख सादी (Sheikh Saadi) ने कहा: नम्रता स्वर्ग के रास्ते की कुंजी है।

5-पेन (pen) ने कहा: विनय के साथ विवेक दूने प्रकाश से चमकता है। योग्य और नम्र मनुष्य किसी राज्य के समान बहुमूल्य रत्न है।
6-ईट कहावत (Brick Proverb) : विनय प्राय: गर्व की अपेक्षा अधिक प्राप्त कर लेता है।
7-के. हैरी (K. harry) ने कहा: विनम्रता का अर्थ है अत्यधिक प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पूरी तरह से सायोजित होने की क्षमता पैदा कर लेना। इसीलिए विनम्र व्यक्ति कभी भी नहीं टूटता।
8-शेक्सपीयर (Shakespeare) ने कहा: स्वाभिमानी भी वही श्रेष्ठ है जो विनम्रता (Vinamrata) को प्रथम स्थान पर रखता है।

महान विचारकों ने विनम्रता पर क्या कहा? (Great Humility)

9-स्पर्जन (Spurgeon) कहा: विनय स्वयं का ठीक-ठीक मूल्यांकन है।
10-नीति वचन (Policy Statement) मैं कहाँ: जो मनुष्य नम्र और प्रभु की भक्ति करता है उसको प्रतिफल में मिलता है—धन, सम्मान और दीर्घ जीवन।
11-स्टेविस्ला लेक (Stavisla Lake) ने कहा: वास्तविक महान् पुरुष की पहली पहचान है उसकी नम्रता।
12-महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) ने कहा: नम्रता से वह कार्य भी बन जाते हैं जो कठोरता से नहीं बन
13-सुदर्शन (Sudarshan) ने कहा: विनय और श्रद्धा के सामने तर्क नहीं पेश किया जाता।

14-तिरुवल्लुवर (thiruvalluvar) ने कहा: जिन लोगों ने विद्वानों के चातुरी भरे शब्दों को नहीं सुना, उनके चित्त पक्वता की नम्रता प्राप्त करना कठिन है।
15-अष्टावक्र (Ashtavakra) ने कहा: जिसमें विनय नहीं, वह विद्वान नहीं।
16-फ्रांसिस बेकन (Francis Bacon) ने कहा: नम्रता या विनय का कोई मूल्य नहीं है, लेकिन इसका लाभ अधिक है। वह मनुष्य जिसमें नम्रता नहीं, इंसान की शक्ल में जानवर है।
17-डी.पाल (D. Pal) ने कहा: नम्रता और धैर्य जीवन के मूलमंत्र हैं।
18-शब्दतरी (vocabulary) मैं कहाँ: पूर्ण मनुष्य वही है जो पूर्ण होने पर और बड़ा होने पर भी नम्र रहता हो और सेवा में निमग्न रहता हो।

विनम्रता पर महापुरुषों के विचार (Thoughts Of Great Men On Humility)

19-महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने कहा: जिनमें नम्रता नहीं आती, वे विद्या का पूरा सदुपयोग नहीं कर सकते।
20-बीचर (Beecher) मैं कहा: नम्रता के पीछे स्वार्थ हो तो वह ढोंग है।
21-विनोबा भावे (Vinoba Bhave) ने कहा: नम्रता का अर्थ लचीलापन है, लचीलेपन में भी तनने की शक्ति है, जीतने की कला है और शौर्य की पराकाष्ठा है।
22-आचार्य श्रीराम (Acharya Shriram) ने कहा: धन्य है वे जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
24-एडीसन (Edison) ने कहा: विनम्रता शरीर की अन्तरात्मा है।
25-जान रस्किल (John Raskill) ने कहा: किसी महान् व्यक्ति की प्रथम परीक्षा उसकी नम्रता से लेनी चाहिए।

26-प्रेमचन्द (Premchand) ने कहा: नम्रता सर्वोत्तम गुण है, क्योंकि जो कार्य स्त्री सौन्दर्य दिखाकर कर सकती है, वही नम्रता कर सकती है। उसका प्रभाव तत्काल ही दूसरों पर पड़ता है।
27-नीतिवचन (Proverbs) मैं कहाँ: आदर पाने के लिए मनुष्य को पहले विनम्र बनना पड़ता है।
28-आचार्य वेदान्त तीर्थ (Acharya Vedanta Tirtha) ने कहा: विनम्रता जहाँ विद्या का प्रतिफल है, वहीं सुख का आधार भी है जो जीवन में सुखी रहना चाहता है, उसे विनम्र होना ही पड़ेगा।
29-कनफ्यूशियस (Confucius) मैं कहाँ: विनय समस्त गुणों की आधारशिला है।

विनम्रता पर महापुरुषों ने कहा (Great Men Said On Humility)

30-हैजालिट (Cholerait) मैं कहाँ: गरीबी विनम्रता की परीक्षा और मित्रता की कसौटी है।
31-चाणक्य (Chanakya) ने कहा: जो विनम्र है वही विश्व विजयी है।
32-राजा ठाकुर (Raja Thakur) ने कहा: नम्रता की ऊँचाई नापने के लिए ब्रह्माण्ड का कोई भी मापक यंत्र सक्षम नहीं।
33-रस्किन (Ruskin) ने कहा: मेग विश्वास है कि वास्तव में महान् व्यक्ति का लक्षण उसकी नम्रता है।
34-राजस्थानी लोकोक्ति (Rajasthani Folklore) मैं कहाँ: झुके हुए वृक्षों से नसीहत मिलती है कि गुणों से सम्पन्न को विनम्र होना चाहिए।
35-डिजरायली (Disraeli) मैं कहाँ: आत्मसम्मान की भावना ही नम्रता की औषधि है।
36-विवेकानन्द (Vivekananda) ने कहा: अपना जीवन लेने के लिए नहीं देने के लिए है।
37-गोल्डामेयर (Golda Meyer) ने कहा: इतने विनम्र न बनो, तुम इतने बड़े आदमी नहीं हो।

पोस्ट निष्कर्ष

दोस्तों आपने ऊपर दिए गए कंटेंट में महापुरुषों के द्वारा दिए गए विनम्रता (Humility) पर अपने विचारों को पढ़ा। आशा है आपको ऊपर दिए गए विनम्रता (Vinamrata) से रिलेटेड क्यूट्स आपको जरूर अच्छा लगा होगा। पोस्ट पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

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2 thoughts on “विनम्रता पर महापुरुषों के अति सुंदर 37 विचार। Vinamrata पर सुविचार”

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