सच्चा धर्म (Saccha Dharm) क्या है? धर्म का उद्देश्य महान् विचारकों की दृष्टि में

धर्म क्या है? धर्म का उद्देश्य क्या है? आज हम जिस Dharm के लिए लड़ते दिखाई दे रहे हैं, क्या वह वास्तव में मनुष्य का सच्चा धर्म (Saccha Dharm) है? आइए देखें महान् विचारकों की दृष्टि में मानव का धर्म (Manav Dharm) क्या होना चाहिए?

सच्चा धर्म (Saccha Dharm)
सच्चा धर्म (Saccha Dharm)

सच्चा धर्म (Saccha Dharm) क्या है?

1-सच्चा धर्म (Saccha Dharm) सकारात्मक होता है, नकारात्मक नहीं। अशुभ एवं असत् से बने रहना ही केवल धर्म नहीं, वास्तव में शुभ एवं सत्कार्यों को करते रहना ही Religion है। सच्चे धर्म की कसौटी तो पवित्र पुरुषार्थ है। – (विवेकानन्द)
2-सारे ही धर्म (Religion) एक ही बात कहते हैं। मनुष्यता के गुणों को विकसित करना ही Dharm का उद्देश्य है। — (हरिकृष्ण प्रेमी)
3-जितने Religion प्रचलित किए गए, सब अपनी व्यापकता और सहृदयता के बल पर ही फैले। – (बकिंम चन्द्र चट्टोपाध्याय)


4-Dharm का पालन करते हुए जो धन प्राप्त होता है, वही सच्चा धन है। जो अधर्म से प्राप्त होता है, वह धन तो धिक्कार देने योग्य है। धन की इच्छा से कभी शाश्वत धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। – (वेदव्यास)
5-धर्म की शक्ति ही अनेक जीवन की शक्ति है, Religion की दृष्टि ही जीवन की दृष्टि है। – (डॉ. राधाकृष्णन्)
6-जीवन में आनन्द को प्राप्त करने की प्यास ही धर्म (Religion) है। – (योगिराज नानक)
7-विश्वव्यापी धर्म (Dharm) तो एक ही है, यद्यपि उसके सैंकड़ों रूपान्तर।- (जी.बी. शॉ)

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धर्म का उद्देश्य क्या है?

8-सावधान होकर धर्म का वास्तविक रहस्य सुनो और उसे सुनकर उसी के अनुसार आचरण करो। जो कुछ तुम अपने लिए हानिप्रद और दुःखदायी समझते हो वह दूसरों के साथ मत करो। – (वेदव्यास महा0)
9-धर्म (Religion) सचमुच बुद्धि-ग्राह्य नहीं, हृदय ग्राह्य है। -महात्मा गांधी
10-जो धर्म शुद्ध अर्थ का विरोधी है वह Dharm नहीं है। जो धर्म राजनीति का विरोधी है वह dharam नहीं है। धर्म रहित अर्थ त्याज्य है। Darm Rahit राज्यसत्ता राक्षसी है। – (महात्मा गांधी)


11-धर्म तो मानव समाज के लिए अफीम है। – (कार्ल मार्क्स)
12-भारतवर्ष का धर्म उसके पुत्रों से नहीं, सुपुत्रियों के प्रताप से ही स्थिर है। भारतीय देवियों ने यदि अपना धर्म छोड़ दिया होता तो देश कब का नष्ट हो चुका होता। – (महर्षि दयानन्द)
13-संसार में धर्म (World Religion) ही सबसे श्रेष्ठ है। धर्म में ही सत्य की प्रतिष्ठा है। – (बाल्मीकि)
14-Dharam होने पर जब मनुष्य इतने नीच हैं, तो Dharam न होने पर वे क्या होंगे। – (फ्रैंकलिन)

धर्म का वास्तविक रहस्य

15-धर्म परमेश्वर की कल्पना कर मनुष्य को दुर्बल बना देता है, उसमें आत्मविश्वास उत्पन्न नहीं होने देता और उसकी स्वतन्त्रता का अपहरण करता है। – (आचार्य नरेन्द्र देव)
16-Dharam Seva का नाम है, लूट और कत्ल का नहीं। – (प्रेमचन्द)
17-धर्म के दश चिह्न हैं। अर्थात् जिसमें यह दश चिह्न धैर्य, क्षमा, दमन करना, अस्तेय, शौच, इन्द्रियनिग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध पाये जावें वह मनुष्य धार्मिक है। – (मनु)
18-सच्चा धर्म (Saccha Dharm) तो पापों की जड़ काटकर मुक्ति का मार्ग-प्रदर्शन करता है, पर मिथ्या धर्म में मुक्ति टकों के बल बिकती है। – (Raskin)


19-धर्म से केवल मोक्ष की ही नहीं अर्थ और काम की भी सिद्धि होती है। – (वेदव्यास महा0)
20-मानव और ईश्वर की कसौटी पर जो जीवन खरा उतरे, वही सच्चे धर्म (Sachahae Dharm) का एकमात्र प्रमाण-पत्र है। – (डॉ. जानसन)
21-मृत्यु में अनेक एक हो जाता है, जीवन में एक अनेक रहता है। धर्म एक हो जाएगा जब ईश्वर का अंत होगा। – (रवीन्द्र)
22-जहाँ धर्म नहीं, वहाँ विद्या, लक्ष्मी, स्वास्थ्य आदि का भी अभाव होता है। धर्म रहित स्थिति में बिल्कुल शुष्कता होती है, शून्यता होती है। – (महात्मा गांधी)

मनुष्य का सच्चा धर्म (Saccha Dharm)

23-धर्म से अर्थ उत्पन्न होता है। Dharam से सुख होता है। Religion से मनुष्य सब कुछ प्राप्त करता है। धर्म जगत का सार है। – (बाल्मीकि)
24-सच्चा धर्म (Saccha Dharm) हमें अपने आश्रितों का सम्मान करना सिखाता है और मानवता, दरिद्रता, विपत्ति, पीड़ा एवं मृत्यु को ईश्वरीय, देन जानता है। – (गेटे)
25-धर्म की पवित्रता शरत्कालीन जल स्रोत के सदृश हो, उसकी उज्ज्वलता शारदीय गगन के नक्षत्रालोक से भी कुछ बढ़कर और शीतल हो। – (जयशंकर प्रसाद)


26-धर्म (Daram) ही व्यक्ति और समाज की प्रगति का मार्ग है। यह शाश्वत, आधारभूत और मौलिक है। …यह माता के समान है जिसे स्वीकार करना ही होगा, पत्नी की तरह नहीं जिसे चाहे स्वीकार या अस्वीकार करें। – (सत्य साईं बाबा)
27-Religion (धर्म) का उद्देश्य है कि मनुष्य के चरित्र में अटल बल प्राप्त।- (स्वामी रामतीर्थ)
28-धर्म उस अग्नि की, जो प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर जलती है, ज्वाला को प्रज्वलित करने में सहायता करता है। – (डॉ. राधाकृष्णन)

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